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गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस में लिखा है

राम नाम सो कल्पतरु, कली कल्याण निवासु। जो सुमिरत भयो भांग ते, तुलसी तुलसीदासु।।

अर्थात्, भगवान श्रीराम का नाम कल्पवृक्ष के समान है, जो इस कलियुग में कल्याण का स्रोत है। तुलसीदास जी कहते हैं कि राम नाम के स्मरण मात्र से उन्होंने स्वयं को भांग जैसे तुच्छ से, तुलसी जैसे पवित्र बना लिया। यानी राम नाम वह शक्ति है, जो असंभव को संभव बना देती है।

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राम नाम लेखन का महत्व

जब हम राम नाम का लेखन करते हैं, तब हमारा शरीर, मन और आत्मा — तीनों भगवान के कार्य में लीन हो जाते हैं। यह लेखन मात्र शब्दों का अभ्यास नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है, जो कलियुग में 100 गुना पुण्य देने वाली मानी गई है।

राम नाम लेखन से:

✅ मन को शांति मिलती है
✅ आत्मा शुद्ध होती है
✅ एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

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राम नाम लिखिए, जीवन को राममय बनाइए।
📿 यह सिर्फ लेखन नहीं, प्रभु से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम है।